विस्तृत उत्तर
भागवत कथा में भगवान कृष्ण की पूजा मंडल और श्रीहरि स्थापना के बाद की जाती है। पहले पितृ तर्पण और प्रायश्चित्त कर मंडल बनाया जाता है और उसमें श्रीहरि को स्थापित किया जाता है। फिर भगवान श्रीकृष्ण को लक्ष्य करके मंत्रोच्चार सहित क्रम से षोडशोपचार विधि से पूजा की जाती है। पूजा के अंत में दक्षिणा और नमस्कार किया जाता है। स्तुति का भाव है कि मैं संसारसागर में डूबा हुआ दीन जीव हूँ, कर्म और मोह रूपी ग्राह ने मुझे पकड़ा है, आप मुझे भवसागर से उठाएँ। फिर भागवत पुस्तक की पूजा की जाती है और उसे श्रीकृष्णस्वरूप मानकर शरण ली जाती है।
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