विस्तृत उत्तर
भागवत कथा को तीर्थ इसलिए कहा गया है क्योंकि वह संसार के कीचड़ को धोने में समर्थ बताई गई है। सप्ताह श्रवण की महिमा में कहा गया है कि इससे भगवान शीघ्र प्राप्त होते हैं और सभी दोषों की निवृत्ति होती है। कथा से वंचित मनुष्य जन्म को व्यर्थ बताते हुए कहा गया कि कथा चित्त की गाँठ खोलती है, संशय काटती है और कर्म क्षीण करती है। फिर इसे भागवत कथा रूप तीर्थ कहा गया है, जो संसार के मल और कर्दम को धोने में पटु है। विद्वानों का कथन है कि जब यह कथा हृदय में स्थित हो जाती है, तब मनुष्य की मुक्ति निश्चित समझनी चाहिए। तीर्थ की तरह यह बाहरी यात्रा से अधिक आंतरिक शुद्धि कराती है।
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