विस्तृत उत्तर
भागवत कथा का वक्ता चुनते समय केवल बोलने की क्षमता नहीं देखी जाती। पाठ में कहा गया है कि वक्ता उत्तम वैष्णव ब्राह्मण हो। वह वेद-शास्त्र की शुद्ध व्याख्या कर सके और श्रोताओं को समझाने के लिये उचित दृष्टांत देने में कुशल हो। वह धीर, विवेकी और अत्यंत निःस्पृह भी होना चाहिए। निःस्पृहता इसलिए महत्वपूर्ण है कि कथा भगवान की हो, न कि लोभ या प्रसिद्धि की। ऐसा वक्ता ही भागवत के भाव को संतुलित, स्पष्ट और श्रोताओं के कल्याणकारी रूप में प्रस्तुत कर सकता है। साथ ही उसके पास एक योग्य सहायक विद्वान भी रखा जाता है ताकि कठिन संशय तुरंत दूर हो सकें।
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