विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में जप के लिये पाँच ब्राह्मणों का वरण करने का निर्देश है। यह व्यवस्था कथा में विघ्न न हो, इसके लिये बताई गई है। वे ब्राह्मण द्वादशाक्षर मंत्र की विद्या से भगवान के नाम का जप करें। इसके बाद ब्राह्मणों, अन्य वैष्णवों और कीर्तन करने वालों को नमस्कार और पूजा करके उनकी आज्ञा से स्वयं आसन पर बैठना चाहिए। इससे सप्ताह का वातावरण केवल कथा-वाचन तक सीमित नहीं रहता; उसमें जप, पूजा, कीर्तन और वैष्णव सम्मान भी शामिल होते हैं। पाँच ब्राह्मणों का जप कथा की रक्षा, पवित्रता और विघ्न-निवारण के लिये रखा गया है।
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