विस्तृत उत्तर
कथा सुनने से पाप जलने की बात धुंधुकारी के मुक्त होने के बाद कही गई है। वह भागवत कथा को प्रेत पीड़ा का विनाश करने वाली और सप्ताह पारायण को कृष्णलोक देने वाला कहता है। वह कहता है कि जब सप्ताह श्रवण का योग होता है, तब पाप काँपते हैं कि अब कथा शीघ्र ही हमारा लय कर देगी। फिर वह अग्नि की उपमा देता है। जैसे अग्नि गीली-सूखी, छोटी-बड़ी सभी प्रकार की लकड़ियों को जलाती है, वैसे ही भागवत सप्ताह का श्रवण मन, वाणी और कर्म से किए गए नए-पुराने, छोटे-बड़े सभी पापों को भस्म कर देता है। यह पाप-दहन श्रवण, सप्ताह और कथा की शक्ति से जुड़ा है।
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