विस्तृत उत्तर
सबकी मुक्ति का प्रसंग गोकर्ण की पुनः कही गई सप्ताह कथा के बाद आता है। पहले धुंधुकारी को विशेष फल मिला था, क्योंकि उसने स्थिर मन से श्रवण और मनन किया था। पार्षदों ने कहा था कि अन्य श्रोता फिर से कथा सुनेंगे तो उन्हें भी वैकुंठ प्राप्त होगा। श्रावण मास में गोकर्ण ने फिर कथा कही और श्रोताओं ने पुनः श्रवण किया। कथा समाप्त होने पर भगवान विमानों सहित प्रकट हुए। गोकर्ण को गले लगाकर उन्होंने अपने समान बनाया और अन्य श्रोताओं को भी दिव्य रूप दिया। उस गाँव में कुत्ते और चांडाल तक जितने जीव थे, वे गोकर्ण की कृपा से विमानों पर चढ़ाए गए और हरिलोक भेजे गए। इस तरह भागवत श्रवण और गोकर्ण की कृपा से व्यापक मुक्ति हुई।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





