विस्तृत उत्तर
भागवत कथा के नित्य पाठ का फल अंतिम श्लोकों में बताया गया है। यह इतिहास परम पवित्र कहा गया है और मुनिश्रेष्ठ शांडिल्य भी इसका आनंदपूर्वक पाठ करते हैं। फिर कहा गया है कि यह आख्यान अत्यंत पवित्र है और एक बार सुनने से ही पापों का समूह भस्म कर देता है। यदि इसे श्राद्ध में पढ़ा जाए तो पितरों को तृप्ति मिलती है। नित्य पाठ का फल अपुनर्भव कहा गया है, अर्थात पुनर्जन्म से मुक्ति। इस प्रकार नित्य पाठ केवल पुण्यकर्म नहीं, बल्कि पाप-क्षय, पितृ-तृप्ति और अंतिम रूप में जन्म-मरण से छूटने वाले फल से जोड़ा गया है।
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