विस्तृत उत्तर
संतान सुख से जुड़ी स्त्रियों के लिये भागवत कथा सुनने का निर्देश दिया गया है। जिन स्त्रियों का रजोदर्शन हो गया हो पर पुष्प न हुआ हो, जो बाँझ हों, जिनकी एक ही संतान होकर रह गई हो, जिनकी संतान जन्म के बाद मर जाती हो, या जिनका गर्भ गिर जाता हो, उन्हें प्रयत्नपूर्वक कथा सुननी चाहिए। पाठ कहता है कि ये लोग यदि विधिपूर्वक कथा सुनें, तो उन्हें उत्तम फल मिल सकता है। यह कथा करोड़ यज्ञों का फल देने वाली कही गई है। इसलिए संतान-संबंधी दुख में भागवत श्रवण को श्रद्धा, नियम और विधि के साथ किया जाने वाला उपाय माना गया है। यहाँ फल कथा-विधि के पालन और शुद्ध श्रवण से जुड़ा है।
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