विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में उद्यापन के विषय में संतुलित निर्देश है। जो लोग विशेष फल की इच्छा रखते हैं, वे कथा-व्रत का उद्यापन जन्माष्टमी व्रत की तरह करें। पर जो भगवान के अकिंचन भक्त हैं, उनके लिये उद्यापन का आग्रह नहीं है। वे श्रवण मात्र से पवित्र हैं, क्योंकि वे निष्काम वैष्णव हैं। इसका अर्थ है कि उद्यापन की विधि फल-कामना और कर्मपूर्ति के लिये उपयोगी है, लेकिन निष्काम भक्ति का स्थान उससे ऊपर माना गया है। फिर भी सामान्य विधि में सप्ताह समाप्ति पर पुस्तक और वक्ता की पूजा, प्रसाद, तुलसी, कीर्तन, दान, गीता पाठ या हवन आदि का विस्तार से विधान दिया गया है।
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