विस्तृत उत्तर
भागवत रस को स्वर्ग से भी श्रेष्ठ इसलिए कहा गया है कि शुकदेवजी इसे स्वर्ग, सत्यलोक, कैलास और वैकुंठ में भी न मिलने वाला बताते हैं। वे रसिक और भावुक श्रोताओं से कहते हैं कि भागवत रस का खूब पान करो और इसे कभी मत छोड़ो। इससे पहले वे इसे वेदरूपी कल्पवृक्ष का पका फल कहते हैं, जो शुकमुख से अमृतरसयुक्त हुआ है। इसमें छिलका और गुठली नहीं, केवल रस ही रस है। यह इसी लोक में सुलभ है, इसलिए चेतना रहते इसका बार-बार पान करना चाहिए। स्वर्ग आदि लोकों की तुलना में भागवत रस को श्रेष्ठ बताने का कारण यह है कि वह मुक्ति, भक्ति, निर्मल ज्ञान और भगवान की प्राप्ति का सार देता है।
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