विस्तृत उत्तर
भागवत सुनने से मोह मिटने का वर्णन कथा के अंत में है। भगवान के अंतर्धान के बाद नारदजी ने भगवान, पार्षदों और शुकदेव आदि तपस्वियों को प्रणाम किया। कथामृत का पान करने से सब लोग अत्यंत आनंदित हुए और उनका सारा मोह नष्ट हो गया। फिर वे अपने-अपने स्थान को चले गए। उसी समय शुकदेवजी ने भक्ति को उसके पुत्रों सहित अपने शास्त्र में स्थापित किया। इसी कारण भागवत का सेवन करने से श्रीहरि वैष्णवों के हृदय में विराजते हैं। यह प्रसंग बताता है कि भागवत श्रवण मन के मोह को काटता है, भक्ति को स्थिर करता है और श्रोता के हृदय में हरि की उपस्थिति का मार्ग बनाता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





