विस्तृत उत्तर
भागवत सुनने से तीन ताप मिटने की बात शुकदेवजी के वचन में आती है। वे बताते हैं कि महर्षि व्यास ने यह भागवत महापुराण रचा है। इसमें कपट रहित, निष्काम परम धर्म का निरूपण है। इसमें शुद्ध अंतःकरण वाले सत्पुरुषों के जानने योग्य कल्याणकारी वास्तविक वस्तु का वर्णन है। उसी से तीन तापों की शांति होती है। इसका आश्रय लेने पर दूसरे शास्त्र या साधन की आवश्यकता नहीं रहती। जब पुण्यात्मा पुरुष इसके श्रवण की इच्छा करते हैं, तो ईश्वर शीघ्र उनके हृदय में विराजमान हो जाता है। इसलिए तीन ताप की शांति भागवत के सत्य, निष्कपट धर्म, वास्तविक तत्त्व और भगवान के हृदय-प्रकट होने से जुड़ी है।
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