विस्तृत उत्तर
भागवत कथा सुनते समय श्रोता के संग और बातचीत पर भी नियम रखा गया है। जो व्यक्ति नियमपूर्वक कथा सुन रहा हो, उसे रजस्वला स्त्री, अंत्यज, म्लेच्छ, पतित, गायत्रीहीन द्विज, ब्राह्मणद्वेषी और वेद को न मानने वाले व्यक्तियों से बातचीत न करने को कहा गया है। यह निर्देश सप्ताह-व्रत की शुद्धता और मन की एकाग्रता बनाए रखने के लिये दिया गया है। इससे पहले आहार-नियम, ब्रह्मचर्य, भूमि-शयन, निंदा-त्याग और काम-क्रोध-लोभ आदि का त्याग बताया गया है। इन सबका केंद्र है: सात दिनों तक श्रोता का व्यवहार संयमित, पवित्र और कथा-श्रवण के अनुकूल रहे।
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