विस्तृत उत्तर
विष्णु सहस्रनाम पाठ भागवत सप्ताह की समापन-विधि में दोष-शांति के लिये बताया गया है। यदि हवन करने की शक्ति न हो, तो हवन सामग्री ब्राह्मण को दान करनी चाहिए। फिर अनेक प्रकार की त्रुटियों को दूर करने और विधि में कहीं कमी या अधिकता रह गई हो तो उसके दोषों की शांति के लिये विष्णुसहस्रनाम का पाठ करना चाहिए। पाठ में कहा गया है कि इससे सभी कर्म सफल हो जाते हैं, क्योंकि इससे बढ़कर कोई कर्म नहीं। इसका भाव है कि मनुष्य से अनुष्ठान में त्रुटि हो सकती है, पर भगवान के नाम का सहारा उसे पूर्णता देता है। इसलिए सप्ताह के बाद विष्णुसहस्रनाम शुद्धि, क्षमा और कर्म-सफलता का साधन है।
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