विस्तृत उत्तर
भागवत सप्ताह में परहेज आहार, मन और संग तीनों स्तरों पर है। आहार में दाल, मधु, तेल, भारी अन्न, भावदूषित पदार्थ और बासी अन्न छोड़ने को कहा गया है। मन से काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को पास नहीं आने देना चाहिए। वाणी से वेद, वैष्णव, ब्राह्मण, गुरु, गोसेवक, स्त्री, राजा और महापुरुषों की निंदा से बचना चाहिए। नियम से कथा सुनने वाले को रजस्वला स्त्री, अंत्यज, म्लेच्छ, पतित, गायत्रीहीन, ब्राह्मणद्वेषी और वेदबाह्य लोगों से बातचीत न करने का निर्देश भी है। ये परहेज श्रोता को शुद्ध, संयमी और कथा-केंद्रित रखने के लिये बताए गए हैं।
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