विस्तृत उत्तर
भागवत वैष्णवों का धन इसलिए कहा गया है कि इसमें वैष्णव जीवन का सार है। शुकदेवजी इसे पुराणों का तिलक और वैष्णवों का धन कहते हैं। इसमें परमहंसों के ग्राह्य निर्मल और परम ज्ञान का वर्णन है। इसमें ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के साथ निवृत्ति मार्ग प्रकाशित किया गया है। जो व्यक्ति भक्ति से इसके श्रवण, पठन और मनन में तत्पर रहता है, वह मुक्त हो जाता है। वैष्णव के लिये धन बाहरी संपत्ति नहीं, बल्कि भगवान की कथा, निर्मल ज्ञान, भक्ति और मुक्ति की दिशा है। इसी कारण भागवत को वैष्णवों की आध्यात्मिक निधि कहा गया है।
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