विस्तृत उत्तर
भागवत कथा में क्रोध और लोभ इसलिए छोड़ने को कहा गया है कि श्रोता का मन कथा के लिये शुद्ध और ग्रहणशील बने। नियमों में काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को पास न फटकने देने का निर्देश है। ये सब मन को चंचल, कठोर और संसार-केंद्रित बनाते हैं। सप्ताह का उद्देश्य केवल कथा सुनना नहीं, बल्कि शुद्ध चित्त से कथा में ध्यान रखना है। पहले ही कहा गया है कि लोक, धन, घर और पुत्र आदि की चिंता छोड़कर शुद्ध मन से कथा सुनने वाले को उत्तम फल मिलता है। अतः क्रोध और लोभ छोड़ना कथा के फल, मन की शुद्धि और भक्ति-वृद्धि के लिये आवश्यक है।
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