श्रीमद्भागवतकाम और लोभ से कैसे बचें?भागवत और भगवद्कथा के निरंतर सेवन से अशुभ वासनाएँ नष्ट होती हैं, फिर काम-लोभ शांत होकर चित्त निर्मल होता है।#काम#लोभ#भागवत
श्रीमद्भागवतभागवत कथा में क्रोध और लोभ क्यों छोड़ें?कथा सुनने वाले को काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को पास नहीं आने देना चाहिए।#क्रोध#लोभ#मन शुद्धि
श्रीमद्भागवतगलत संगति से जीवन कैसे नष्ट होता है?गलत संगति ने धुंधुकारी को चोरी, वासना, हिंसा और अंत में हत्या तथा प्रेत योनि तक पहुँचा दिया।#गलत संगति#जीवन#धुंधुकारी
श्रीमद्भागवतकुसंग का परिणाम क्या होता है?कुसंग से धुंधुकारी की बुद्धि नष्ट हुई, उसने चोरी और क्रूर कर्म किए और अंत में उसी संगति ने उसकी हत्या कर दी।#कुसंग#लोभ#धुंधुकारी
श्रीमद्भागवतकलियुग में तपस्या का सार क्यों घट गया?कहा गया है कि काम, क्रोध, लोभ और तृष्णा से चित्त व्याकुल होने पर तप का सार घट जाता है।#कलियुग#तपस्या#लोभ
श्रीमद्भागवतकलियुग में पाप और पाखंड क्यों बढ़ता है?स्रोत के अनुसार लोभ, असत्य, सदाचार का अभाव, शास्त्र-अभ्यास की कमी और दिखावे से पाप-पाखंड बढ़ता है।#कलियुग#पाप#पाखंड
लोकअसुरों ने अमृत कलश क्यों छीन लिया?असुरों ने अमर होने के लोभ में धन्वंतरि से अमृत कलश छीन लिया।#असुर#अमृत कलश#लोभ
लोकतलातल में लोभ और कपट का क्या संबंध है?तलातल की तामिस्र ऊर्जा लोभ और कपट को बढ़ाती है।#तलातल#लोभ#कपट
लोकतामिस्र ऊर्जा क्या है?तामिस्र ऊर्जा लोभ, कपट और आत्म-संरक्षण की तीव्र प्रवृत्ति को जन्म देने वाली तलातल की ऊर्जा है।#तामिस्र ऊर्जा#तलातल#लोभ
लोकतलातल की ऊर्जा को तामिस्र क्यों कहा गया है?तलातल की तामिस्र ऊर्जा लोभ, कपट और आत्म-संरक्षण की तीव्र प्रवृत्ति पैदा करती है।#तामिस्र#तलातल ऊर्जा#लोभ
जीवन एवं मृत्युलोभ करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?लोभी को — रौरव नरक (लालची-ईर्ष्यालु), तमिश्रम (धन-हड़पने वाले), कुड्म (केवल अपना पेट भरने वाले)। पुनर्जन्म में दरिद्रता। 'लोभ → नरक → दरिद्रता।'#लोभ#रौरव#तमिश्रम
जीवन एवं मृत्युलोभ करने वाले को क्या दंड मिलता है?लोभी को — रौरव नरक (अग्निकुंड), लोभ से जीव-हत्या पर तामिस्र नरक (पिटाई), संपत्ति हड़पने पर तमिश्रम नरक। 'अकेला ही अंधकारपूर्ण नरक में जाता है।' पुनर्जन्म में दरिद्रता।#लोभ#दंड#रौरव