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क्रोध से जुड़े सभी प्रश्न(16)

क्रोध पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 16 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

महर्लोक के निवासियों की 'विजय' विशेषता का क्या अर्थ है?

विजय का अर्थ है — काम, क्रोध, लोभ, अज्ञान और काल के प्रभाव पर पूर्ण विजय। महर्लोक के ऋषियों पर षड्विकार और बुढ़ापे-रोग का कोई प्रभाव नहीं होता।

#विजय#महर्लोक#काम
दिव्यास्त्र

वज्र के प्रहार के बाद वायुदेव ने क्या किया?

वायुदेव ने क्रोध में संसार से वायु का प्रवाह रोक दिया जिससे सभी प्राणियों का जीवन संकट में पड़ गया।

#वायुदेव#हनुमान#वायु रोकना
साधु और संत

जितेन्द्रिय व्यक्ति कैसा होता है?

जो इन्द्रिय-विषयों या ऐश्वर्यों की अप्राप्ति पर क्रोध नहीं करता और प्राप्ति पर हर्षित नहीं होता, वह जितात्मा है।

#जितेन्द्रिय#इन्द्रिय संयम#ऐश्वर्य
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में क्रोध और लोभ क्यों छोड़ें?

कथा सुनने वाले को काम, क्रोध, मद, मान, मत्सर, लोभ, दंभ, मोह और द्वेष को पास नहीं आने देना चाहिए।

#क्रोध#लोभ#मन शुद्धि
लोक

तामिस्र क्या है

तामिस्र वह अज्ञान है जिसमें जीव ईर्ष्या, क्रोध और स्वतंत्र भोक्ता-भाव में फँसता है।

#तामिस्र#अविद्या#क्रोध
लोक

त्रयोदशी श्राद्ध में क्रोध क्यों वर्जित है?

क्रोध से पितर निराश लौटते हैं।

#क्रोध#श्राद्ध निषेध#पितर
लोक

दशमी श्राद्ध में क्रोध क्यों वर्जित है?

क्रोध श्राद्ध भाव को दूषित करता है।

#क्रोध#श्राद्ध नियम#आचरण
लोक

महातल के नागों को क्रोधवश गण क्यों कहा गया है?

महातल के नाग क्रोध, ईर्ष्या और भौतिक आसक्ति से भरे उग्र स्वभाव के कारण क्रोधवश गण कहलाते हैं।

#क्रोधवश गण#महातल नाग#काद्रवेय
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

रौद्रपुर कैसा नगर है?

रौद्रपुर क्रोध और उग्रता से भरा भयानक नगर है।

#रौद्रपुर#क्रोध#उग्रता
नियम और पात्रता

हवन के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

हवन के दौरान निषेध: क्रोध, अपशब्द, मिथ्या भाषण, हँसना → यज्ञ ऊर्जा खंडित। अपान वायु या अशुद्ध जीव (बिल्ली, चूहा) का स्पर्श → भारी व्यवधान। मुँह से फूंक मारकर अग्नि न जलाएं। आहुति अग्नि के किनारे या धुएं में नहीं — मध्य भाग में दें।

#हवन निषेध#क्रोध#मिथ्या भाषण
महाकाली और चामुंडा

महाकाली का प्राकट्य कैसे हुआ?

चंड-मुंड ने देवी अंबिका को पकड़ने का प्रयास किया → देवी को भयानक क्रोध → मुख काला पड़ा → ललाट के मध्य से 'महाकाली' प्रकट हुईं। स्वरूप: चीते का चर्म, खट्वांग, पाश, नर-मुंडों की माला, विशाल मुख, लाल नेत्र, लपलपाती जिह्वा।

#महाकाली प्राकट्य#ललाट#क्रोध
रामचरितमानस — बालकाण्ड

लक्ष्मणजी ने पृथ्वी को वीरविहीन कहने पर क्या प्रतिक्रिया दी?

लक्ष्मणजी ने क्रोध से कहा — ब्रह्माण्ड गेंद-सा उठा लूँ, मेरु मूली-सा तोड़ दूँ, यह धनुष तो क्या! वचन बोलते ही पृथ्वी डगमगाई, दिग्गज काँपे। सब डरे, सीता हर्षित, जनक सकुचाये।

#बालकाण्ड#लक्ष्मण#वीरविहीन
रामचरितमानस — बालकाण्ड

धनुष भंग की ध्वनि सुनकर कौन क्रोधित होकर आये?

परशुरामजी (भार्गव/रेणुकासुत) — शिवजी के परम भक्त और विष्णु अवतार। उन्हें लगा कि शिवजी के धनुष का अपमान हुआ। क्रोधित होकर सभा में आये — 'किसने शिवजी का धनुष तोड़ा?' इसके बाद प्रसिद्ध परशुराम-लक्ष्मण संवाद।

#बालकाण्ड#परशुराम#धनुष भंग
रामचरितमानस — बालकाण्ड

लक्ष्मणजी ने जनक की बात सुनकर क्या कहा?

'तोरौं छत्रक दंड जिमि तव प्रताप बल नाथ' — धनुष को कुकुरमुत्ते की तरह तोड़ दूँ। प्रभु की शपथ — ऐसा न करूँ तो धनुष-तरकस कभी न छुऊँ। वचन बोलते ही पृथ्वी डगमगाई, दिग्गज काँपे, राजा डरे, सीता हर्षित, जनक सकुचाये।

#बालकाण्ड#लक्ष्मण वचन#क्रोध
जीवन एवं मृत्यु

क्रोध करने वाले को कौन-सा नरक मिलता है?

क्रोध करने वाले को — लोहशंकु (निर्दोष-हत्या पर), रौरव (पत्नी-पीड़न पर), सुघोर्म (अन्याय पर खौलता तेल)। पुनर्जन्म में उसी हिंसा का शिकार।

#क्रोध#लोहशंकु#रौरव
जीवन एवं मृत्यु

क्रोध करने वाले को क्या दंड मिलता है?

क्रोधी को — क्रोध में हिंसा पर लोहशंकु-क्रीमिक नरक, स्त्री-पीड़न पर रौरव नरक (कष्ट कई गुना), अन्याय पर सुघोर्म नरक (खौलता तेल)। पुनर्जन्म में उसी हिंसा का शिकार।

#क्रोध#दंड#नरक
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