विस्तृत उत्तर
धनुष भंग की भयंकर ध्वनि सुनकर परशुरामजी (भार्गव/रेणुकासुत) क्रोधित होकर आये। वे भगवान विष्णु के अवतार और शिवजी के परम भक्त थे — उन्हें लगा कि किसी ने उनके इष्टदेव शिवजी के धनुष का अपमान किया है।
बालकाण्ड में इसका वर्णन धनुष भंग और जयमाला के तुरन्त बाद आता है। परशुरामजी ने अत्यन्त क्रोधित होकर सभा में प्रवेश किया और पूछा कि किसने शिवजी का धनुष तोड़ा। इसके बाद परशुराम-लक्ष्मण संवाद का प्रसिद्ध प्रसंग आता है।





