विस्तृत उत्तर
देव-यज्ञ एक अत्यंत संवेदनशील एवं पवित्र कर्म है, अतः इसमें कई प्रकार के निषेध बताए गए हैं। हवन के दौरान यदि यजमान क्रोध करे, अपशब्द कहे, मिथ्या भाषण करे अथवा हँस पड़े, तो यज्ञ की ऊर्जा खंडित हो जाती है।
इसी प्रकार, यदि हवन करते समय अपान वायु (गैस) का उत्सर्जन हो जाए, या किसी अशुद्ध जीव (जैसे बिल्ली, चूहा आदि) का स्पर्श हो जाए, तो इसे यज्ञ में भारी व्यवधान माना गया है।
अग्नि को कभी भी मुख से फूंक मारकर नहीं प्रज्वलित करना चाहिए; इसके लिए पंखे, कुशा अथवा अन्य किसी साधन का प्रयोग करना चाहिए।
इसी प्रकार, हवन की आहुति सदैव अग्नि के मध्य भाग में (जहाँ अग्नि सर्वाधिक प्रज्वलित हो) दी जानी चाहिए। अग्नि के किनारों पर या केवल धुएं वाले स्थान पर आहुति देना निषिद्ध है।
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