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विस्तृत उत्तर
हवन के दौरान यदि यजमान क्रोध करे, अपशब्द कहे, मिथ्या भाषण करे अथवा हँस पड़े, तो यज्ञ की ऊर्जा खंडित हो जाती है। इसी प्रकार, यदि हवन करते समय अपान वायु (गैस) का उत्सर्जन हो जाए, या किसी अशुद्ध जीव (जैसे बिल्ली, चूहा आदि) का स्पर्श हो जाए, तो इसे यज्ञ में भारी व्यवधान माना गया है।
इन त्रुटियों के प्रायश्चित्त स्वरूप शास्त्र निर्देश देते हैं कि यजमान को तुरंत अपने हृदय और जल का स्पर्श कर भगवान विष्णु का स्मरण करना चाहिए।
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