विस्तृत उत्तर
हवन करने के लिए भारतीय धर्मशास्त्रों, विशेषकर मनुस्मृति तथा याज्ञवल्क्य स्मृति में अत्यंत स्पष्ट नियम एवं पात्रता का निर्धारण किया गया है। देव-यज्ञ का अनुष्ठान करने वाला व्यक्ति, चाहे वह ब्रह्मचारी हो अथवा गृहस्थ, उसे शारीरिक एवं मानसिक रूप से पूर्णतः पवित्र होना चाहिए।
याज्ञवल्क्य स्मृति के अनुसार, ब्रह्मचारी सदैव व्रती रहता है और उसे अपनी दिनचर्या में वेदाध्ययन के साथ-साथ अग्निहोत्र का भी नियमित पालन करना चाहिए।
मनुस्मृति में यह स्पष्ट किया गया है कि अशुद्ध अवस्था में, अपवित्र वस्त्र धारण कर अथवा रजस्वला स्त्री के स्पर्श के पश्चात यज्ञ कर्म निषिद्ध है। हवन करने वाले यजमान को स्नानादि से निवृत्त होकर, शुद्ध एवं स्वच्छ वस्त्र धारण कर ही यज्ञ-वेदी पर आसीन होना चाहिए।





