का सरल उत्तर
हवन से पहले: शारीरिक और मानसिक पवित्रता अनिवार्य। मनुस्मृति: अशुद्ध अवस्था, अपवित्र वस्त्र या रजस्वला स्पर्श के बाद यज्ञ निषिद्ध। स्नान करके, शुद्ध-स्वच्छ वस्त्र पहनकर यज्ञ वेदी पर बैठें।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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