विस्तृत उत्तर
चंडी पाठ के नियम धर्म सिंधु और शाक्त परंपरा में वर्णित हैं:
सामान्य नियम (सप्तशती नियम के समान)
- 1स्नान, लाल या पीत वस्त्र
- 2पूर्व या उत्तर मुख
- 3लाल आसन
- 4पुस्तक भूमि पर नहीं
चंडी पाठ के विशेष नियम
1षडंग पाठ अनिवार्य
शुद्ध चंडी पाठ में छः अंग (षडंग) का पाठ करना चाहिए:
- ▸कवच
- ▸अर्गला
- ▸कीलक
- ▸नवार्ण मंत्र
- ▸13 अध्याय
- ▸उपसंहार
2कीलन-विकीलन
कीलक स्तोत्र' में मंत्र की 'कील' (रुकावट) लगी है। पाठ से पहले विकीलन (कील हटाना) आवश्यक है:
> 'ॐ नमश्चण्डिकायै'
तीन बार बोलकर कीलक पाठ करें।
3देव्यथर्वशीर्ष
पाठ से पूर्व देव्यथर्वशीर्ष का पाठ शुभ है।
4मध्याह्न में विश्राम
दीर्घ पाठ में दोपहर के समय विश्राम — पाठ थोड़ी देर रोक सकते हैं।
5अशुद्धि में उपचार
यदि पाठ में कोई अशुद्धि हो:
- ▸नवार्ण मंत्र 108 बार
- ▸या पुनः उस श्लोक का पाठ
6पाठ के बाद
- ▸आरती
- ▸क्षमा प्रार्थना: 'अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया...'
- ▸प्रसाद वितरण
शत चंडी के अतिरिक्त नियम
शत चंडी (100 पाठ) में:
- ▸9 कुंड हवन
- ▸9 विद्वान पुरोहित
- ▸9 दिन या अधिक
- ▸विधिवत दीक्षित साधक





