विस्तृत उत्तर
चंडी पाठ (दुर्गा सप्तशती) के नियम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं — इनकी उपेक्षा से पाठ का फल नहीं मिलता:
अनिवार्य नियम
- 1कवच, अर्गला, कीलक पहले:
चंडी पाठ से पूर्व देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक का पाठ अनिवार्य है — बिना इनके पाठ का फल नहीं मिलता।
- 1नवार्ण मंत्र:
पाठ से पूर्व और बाद में नवार्ण मंत्र जप करें — 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे'।
- 1पाठ की अखंडता:
शुरू किया हुआ पाठ पूरा करें। बीच में पाठ न छोड़ें।
- 1तन की शुद्धि:
- ▸स्नान आवश्यक
- ▸मासिक धर्म में स्त्रियां पाठ न करें
- ▸शवदर्शन या श्मशान यात्रा के बाद स्नान करके पाठ करें
- 1स्थान:
- ▸स्वच्छ पूजा स्थान
- ▸पुस्तक पीठिका (लकड़ी के आसन) पर पुस्तक रखें
- ▸भूमि पर ग्रंथ न रखें
- 1उच्चारण:
- ▸स्पष्ट उच्चारण करें
- ▸अशुद्ध उच्चारण से बचें
- ▸यदि शुद्ध उच्चारण न आए तो किसी विद्वान से सीखें
- 1दिशा और आसन:
- ▸पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें
- ▸लाल ऊनी या कुश आसन पर बैठें
- ▸काले आसन का प्रयोग न करें
विशेष नियम
- ▸एकादश चंडी या शतचंडी के लिए विद्वान पंडित आवश्यक
- ▸पाठ के दौरान भ्रमण न करें
- ▸पाठकाल में फोन और अनावश्यक वार्तालाप वर्जित
क्षमा प्रार्थना
पाठ के अंत में: 'अपराध सहस्राणि क्रियंते अहर्निशम्। दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥'





