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पाठ नियम📜 दुर्गा सप्तशती - प्राधानिक रहस्य, तंत्र शास्त्र2 मिनट पठन

चंडी पाठ के नियम क्या हैं?

संक्षिप्त उत्तर

चंडी पाठ से पूर्व देवी कवच, अर्गला, कीलक और नवार्ण मंत्र अनिवार्य है। स्नान करें, लाल आसन पर बैठें, पुस्तक भूमि पर न रखें, शुद्ध उच्चारण करें और एक बार शुरू करें तो पूरा करें।

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विस्तृत उत्तर

चंडी पाठ (दुर्गा सप्तशती) के नियम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं — इनकी उपेक्षा से पाठ का फल नहीं मिलता:

अनिवार्य नियम

  1. 1कवच, अर्गला, कीलक पहले:

चंडी पाठ से पूर्व देवी कवच, अर्गला स्तोत्र और कीलक का पाठ अनिवार्य है — बिना इनके पाठ का फल नहीं मिलता।

  1. 1नवार्ण मंत्र:

पाठ से पूर्व और बाद में नवार्ण मंत्र जप करें — 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे'।

  1. 1पाठ की अखंडता:

शुरू किया हुआ पाठ पूरा करें। बीच में पाठ न छोड़ें।

  1. 1तन की शुद्धि:
  • स्नान आवश्यक
  • मासिक धर्म में स्त्रियां पाठ न करें
  • शवदर्शन या श्मशान यात्रा के बाद स्नान करके पाठ करें
  1. 1स्थान:
  • स्वच्छ पूजा स्थान
  • पुस्तक पीठिका (लकड़ी के आसन) पर पुस्तक रखें
  • भूमि पर ग्रंथ न रखें
  1. 1उच्चारण:
  • स्पष्ट उच्चारण करें
  • अशुद्ध उच्चारण से बचें
  • यदि शुद्ध उच्चारण न आए तो किसी विद्वान से सीखें
  1. 1दिशा और आसन:
  • पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें
  • लाल ऊनी या कुश आसन पर बैठें
  • काले आसन का प्रयोग न करें

विशेष नियम

  • एकादश चंडी या शतचंडी के लिए विद्वान पंडित आवश्यक
  • पाठ के दौरान भ्रमण न करें
  • पाठकाल में फोन और अनावश्यक वार्तालाप वर्जित

क्षमा प्रार्थना

पाठ के अंत में: 'अपराध सहस्राणि क्रियंते अहर्निशम्। दासोयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥'

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शास्त्रीय स्रोत
दुर्गा सप्तशती - प्राधानिक रहस्य, तंत्र शास्त्र
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