विस्तृत उत्तर
महातल के नागों को क्रोधवश गण इसलिए कहा गया है क्योंकि उनका मूल स्वभाव क्रोध, ईर्ष्या और भौतिक आसक्ति से परिपूर्ण है। श्रीमद्भागवत पुराण में महातल के काद्रवेय सर्पों को क्रोधवश नामक गण के अंतर्गत बताया गया है। पुराणों और वाल्मीकि रामायण के अनुसार क्रोधवशा महर्षि कश्यप की एक अन्य पत्नी का भी नाम था, जो दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं। उनका स्वभाव अत्यंत क्रोधी और तीक्ष्ण था, और उनसे उत्पन्न वंशज स्वभाव से उग्र, तीक्ष्ण दांतों वाले और हिंसक माने गए। महातल के काद्रवेय नाग इसी उग्र और क्रोधी स्वभाव का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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