विस्तृत उत्तर
मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) के सातवें अध्याय में देवी के अत्यंत उग्र रूप 'काली' की उत्पत्ति का अद्भुत वर्णन प्राप्त होता है।
जब चंड और मुंड अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित होकर हिमालय के स्वर्ण शिखर पर पहुँचे और देवी अंबिका (दुर्गा) को पकड़ने का प्रयास किया, तो देवी को उन पर अत्यंत भयानक क्रोध आया। क्रोध के कारण देवी अंबिका का मुख काले रंग का हो गया और उनके ललाट (माथे) के मध्य भाग से विकरालमुखी 'महाकाली' प्रकट हुईं।
यह महाकाली चीते का चर्म पहने हुए थीं, उनके हाथ में खट्वांग और पाश था, और वे नर-मुंडों की माला धारण किए हुए थीं। उनका मुख अत्यंत विशाल था, नेत्र लाल थे और जिह्वा बाहर लपलपा रही थी।





