विस्तृत उत्तर
जब चंड-मुंड, रक्तबीज और शुंभ-निशुंभ जैसे महापराक्रमी असुरों का आतंक चरम पर पहुँच गया, तब देवी पार्वती के ही अंश से 'महाकाली' (विनाशकारी रूप) का प्राकट्य हुआ। महाकाली माता पार्वती के अन्य सौम्य रूपों से सर्वथा भिन्न एक भयानक और विनाशक रूप है, जो समय के अंत (प्रलय) का प्रतीक है।
शिव पुराण में एक अत्यंत रोचक कथा है कि एक बार शिव ने परिहास में माता पार्वती को 'काली' (काले रंग वाली) कह दिया था। इससे रुष्ट होकर माता ने घोर तपस्या की और 'गौरी' बन गईं। उसी तपस्या के दौरान उनके शरीर (कोश) से एक श्यामल देवी प्रकट हुईं जो 'कौशिकी' कहलाईं, जिन्होंने शुंभ-निशुंभ का संहार किया।





