विस्तृत उत्तर
भागवत कथा को भवरोग की औषधि इसलिए कहा गया है कि कलियुग में यह संसाररूपी रोग को काटने वाली रामबाण औषधि बताई गई है। सूतजी कहते हैं कि भागवत कथा श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है, सारे पापों का नाश करती है, मुक्ति का एकमात्र कारण है और भक्ति को बढ़ाने वाली है। संतों से कहा गया है कि वे आदरपूर्वक इस कथामृत का पान करें। फिर प्रश्न किया गया है कि लोक में अन्य कल्याणकारी साधनों का विचार और तीर्थसेवन करने से क्या होगा, जब यह कथा ही ऐसा प्रभाव रखती है। इसलिए भवरोग की औषधि होने का अर्थ है कि यह जन्म-मरण, पाप, मोह और संसार-दुख से ग्रस्त जीव को कृष्ण-भक्ति और मुक्ति की दिशा देती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





