विस्तृत उत्तर
भगवान के दिव्य जन्मों की कथा का फल बताया गया है। पाठ कहता है कि भगवान की दिव्य जन्म-कथा अत्यंत गोपनीय और रहस्यमयी है। जो मनुष्य एकाग्र होकर, नियमपूर्वक, सायंकाल और प्रातःकाल प्रेम से इसका पाठ करता है, वह सब दुखों से छूट जाता है। यहाँ फल केवल कथा जान लेने से नहीं, बल्कि नियम, एकाग्रता और प्रेमपूर्वक पाठ से जुड़ा हुआ है। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इस श्लोक में भगवान के जन्म को दिव्य और रहस्यमय कहा गया है, साधारण जन्म नहीं। इसलिए अवतार-कथा का श्रद्धापूर्वक नियमित पाठ मनुष्य को दुखों से मुक्त करने वाला साधन है।
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