विस्तृत उत्तर
कहा गया है कि इतिहास और पुराण को पाँचवाँ वेद कहा जाता है। इसके ठीक पहले व्यासजी द्वारा एक वेद को चार भागों में विभाजित करने की बात आती है और फिर इतिहास-पुराण को पाँचवें वेद के रूप में रखा गया है। आगे महाभारत की रचना का कारण बताया गया: स्त्री, शूद्र और पतित जाति त्रयी वेद-श्रवण के अधिकारी नहीं थे, इसलिए उनके कल्याण के लिए व्यासजी ने महाभारत इतिहास बनाया। व्यासजी स्वयं कहते हैं कि महाभारत के बहाने उन्होंने वेद के अर्थ को खोल दिया। इसलिए इतिहास-पुराण को पाँचवाँ वेद कहने का भाव यह है कि वे वेदार्थ और धर्मज्ञान को उन लोगों तक पहुँचाते हैं जिनके लिए प्रत्यक्ष वेद-अध्ययन सहज या अनुमत नहीं था।
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