विस्तृत उत्तर
भगवान का चौदहवाँ अवतार नरसिंह रूप में बताया गया है। नरसिंह अवतार में उन्होंने अत्यंत बलवान दैत्यराज हिरण्यकशिपु को मारा। पाठ कहता है कि भगवान ने उसके वक्षस्थल या छाती को अपने नखों से अनायास फाड़ दिया। हिंदी व्याख्या में इसकी तुलना ऐसे की गई है जैसे चटाई बनाने वाला सरकंडे को चीर देता है। यहाँ प्रह्लाद आदि का पूरा प्रसंग नहीं आता, इसलिए उत्तर उपलब्ध वर्णन तक ही सीमित है। इस श्लोक के आधार पर नरसिंह अवतार भगवान की दैत्य-विनाशक शक्ति का रूप है, जिसमें वे किसी शस्त्र के बजाय अपने नखों से ही हिरण्यकशिपु का अंत कर देते हैं।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





