विस्तृत उत्तर
द्रौपदी के पुत्रों की हत्या के बाद अर्जुन ने अपराधी का सिर लाने की प्रतिज्ञा की। उन्होंने श्रीकृष्ण को सारथि बनाया, कवच धारण किया, गाण्डीव धनुष लेकर रथ पर बैठे और अश्वत्थामा के पीछे दौड़े। अश्वत्थामा ने अर्जुन को आते देखा तो भयभीत होकर भागा। जब उसके घोड़े थक गए और वह अकेला पड़ गया, तब उसने ब्रह्मास्त्र चलाया। कृष्ण के निर्देश पर अर्जुन ने ब्रह्मास्त्र का ही संधान करके उस भयंकर तेज को शांत किया और लोकों पर संकट देखकर दोनों अस्त्र लौटा लिए। इसके बाद अर्जुन क्रोध से लाल आँखों के साथ तेजी से अश्वत्थामा के पास पहुँचे और उसे वैसे बाँध लिया जैसे रस्सी से पशु बाँधा जाता है। इस तरह अश्वत्थामा जीवित पकड़ा गया।
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