विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत में अश्वत्थामा की कथा महाभारत युद्ध के बाद आती है। जब कौरव-पांडव पक्ष के अनेक वीर मारे जा चुके थे और दुर्योधन की जांघ टूट चुकी थी, तब अश्वत्थामा ने द्रौपदी के सोते हुए पुत्रों के सिर काटकर दुर्योधन को भेंट किए। यह कर्म दुर्योधन को भी अप्रिय लगा, क्योंकि ऐसे नीच कर्म की सब निंदा करते हैं। द्रौपदी के विलाप पर अर्जुन ने अपराधी का सिर लाने की प्रतिज्ञा की और कृष्ण को सारथि बनाकर अश्वत्थामा के पीछे गए। अश्वत्थामा ने प्राण बचाने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया, जिसे लौटाना उसे नहीं आता था। कृष्ण की आज्ञा से अर्जुन ने ब्रह्मास्त्र से ही उसे शांत किया, अश्वत्थामा को पकड़ा और बाद में उसकी मणि बालों सहित काटकर, तेजहीन कर, उसे शिविर से निकाल दिया।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





