विस्तृत उत्तर
अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र आक्रमण के गर्व से नहीं, बल्कि भय और प्राणसंकट में चलाया। द्रौपदी के पुत्रों की हत्या के बाद अर्जुन श्रीकृष्ण को सारथि बनाकर उसके पीछे दौड़े। अश्वत्थामा ने दूर से देखा कि अर्जुन रथ पर उसकी ओर तेजी से आ रहे हैं, इसलिए वह भयभीत होकर जहाँ तक भाग सकता था भागा। जब उसने देखा कि उसके रथ के घोड़े थक गए हैं और वह बिल्कुल अकेला है, तो उसने अपने को बचाने का एकमात्र साधन ब्रह्मास्त्र समझा। उसे ब्रह्मास्त्र वापस लेने की विधि मालूम नहीं थी, फिर भी प्राण बचाने के लिए उसने आचमन करके ध्यानस्थ होकर उसका संधान कर दिया। इसीलिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग संकट और भय से प्रेरित था।
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