विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत में द्रौपदी के पुत्रों की हत्या का अपराध द्रोणपुत्र अश्वत्थामा से जुड़ा है। युद्ध के बाद जब अधिकांश वीर मारे जा चुके थे और दुर्योधन पराजित अवस्था में था, तब अश्वत्थामा ने द्रौपदी के सोते हुए पुत्रों के सिर काटे। उसने इन्हें दुर्योधन को भेंट किया, यह सोचकर कि उसने अपने स्वामी का प्रिय काम किया है। लेकिन यह कर्म दुर्योधन को भी अच्छा नहीं लगा, क्योंकि सोए हुए निरपराध बालकों की हत्या निंदनीय थी। द्रौपदी ने जब पुत्रों की मृत्यु सुनी तो अत्यंत शोक में रोने लगी। अर्जुन ने उसे सांत्वना दी और प्रतिज्ञा की कि वह इस आततायी अपराधी का सिर काटकर लाएगा।
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