विस्तृत उत्तर
अर्जुन और अश्वत्थामा की ब्रह्मास्त्र कथा द्रौपदी के पुत्रों की हत्या के बाद शुरू होती है। अर्जुन ने द्रौपदी से अपराधी का सिर लाने की प्रतिज्ञा की और श्रीकृष्ण को सारथि बनाकर अश्वत्थामा के पीछे चले। अश्वत्थामा ने अर्जुन को आते देखा तो प्राण बचाने के लिए भागा। जब वह असहाय हुआ, तो उसने ब्रह्मास्त्र चला दिया, हालांकि उसे उसे वापस लेना नहीं आता था। ब्रह्मास्त्र का प्रचंड तेज फैल गया और अर्जुन ने श्रीकृष्ण से सहायता मांगी। कृष्ण ने बताया कि यह अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र है और इसका निवारण ब्रह्मास्त्र से ही हो सकता है। अर्जुन ने भगवान की परिक्रमा करके ब्रह्मास्त्र का संधान किया। दोनों अस्त्रों का तेज बढ़ा, पर लोकों का संकट देखकर कृष्ण की अनुमति से अर्जुन ने दोनों को लौटा लिया और फिर अश्वत्थामा को बाँध लिया।
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