विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत में अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र अत्यंत प्रचंड तेज वाला अस्त्र बताया गया है। जब अर्जुन उसके पीछे आए और अश्वत्थामा ने स्वयं को अकेला तथा असहाय देखा, तो उसने प्राण बचाने का उपाय ब्रह्मास्त्र ही समझा। उसे इस अस्त्र को लौटाने की विधि नहीं आती थी, फिर भी प्राणसंकट देखकर उसने आचमन किया, ध्यान लगाया और ब्रह्मास्त्र का संधान किया। उस अस्त्र से सब दिशाओं में भयंकर तेज फैल गया। अर्जुन ने उस तेज को अपने प्राणों के लिए संकट माना और श्रीकृष्ण से पूछा कि यह क्या है। श्रीकृष्ण ने बताया कि यह द्रोणपुत्र अश्वत्थामा का चलाया हुआ ब्रह्मास्त्र है और किसी दूसरे अस्त्र से इसका निवारण नहीं हो सकता; इसे ब्रह्मास्त्र के तेज से ही शांत करना होगा।
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