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शास्त्र ज्ञान📜 महाभारत (आदि पर्व 11.13, अनुशासन पर्व 115.1)2 मिनट पठन

अहिंसा परमो धर्मः का पूरा श्लोक और अर्थ क्या?

संक्षिप्त उत्तर

पूरा श्लोक: 'अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तथैव च।' अर्थ: अहिंसा परम धर्म है, पर धर्म-रक्षा हेतु हिंसा भी धर्म ही है। अक्सर अधूरा उद्धृत किया जाता है। महाभारत (अनुशासन पर्व) में वर्णित।

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विस्तृत उत्तर

अहिंसा परमो धर्मः' हिंदू धर्म का सबसे प्रसिद्ध वाक्यों में से एक है, परंतु अक्सर इसे अधूरा उद्धृत किया जाता है।

पूरा श्लोक (महाभारत — अनुशासन पर्व)

*अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च।*

अर्थ: अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है, और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा भी (धर्म ही है)

विस्तृत श्लोक (महाभारत — आदि पर्व 11.13)

*अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परो दमः।

अहिंसा परमं दानमहिंसा परमं तपः।*

अर्थ: अहिंसा परम धर्म है, अहिंसा परम संयम है, अहिंसा परम दान है, अहिंसा परम तपस्या है।

संदर्भ और व्याख्या

  1. 1अहिंसा सर्वोपरि — सामान्य स्थिति में अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है। किसी जीव को अकारण कष्ट नहीं देना चाहिए।
  1. 1'धर्म हिंसा तथैव च' — जब धर्म की रक्षा, निर्दोषों की रक्षा या न्याय के लिए हिंसा आवश्यक हो, तो वह हिंसा भी धर्म ही है। इसीलिए गीता में कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध करने का आदेश दिया — अधर्म के विरुद्ध लड़ना क्षत्रिय का धर्म है।
  1. 1संतुलित दृष्टिकोण — हिंदू धर्म न तो पूर्ण अहिंसावादी है (जैन धर्म की तरह), न पूर्ण हिंसा समर्थक। यह संदर्भ-आधारित (contextual) दृष्टिकोण है।

महत्वपूर्ण: अधूरा श्लोक ('अहिंसा परमो धर्मः' — बिना दूसरी पंक्ति) उद्धृत करना भ्रामक है। पूर्ण श्लोक हिंदू धर्म के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

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शास्त्रीय स्रोत
महाभारत (आदि पर्व 11.13, अनुशासन पर्व 115.1)
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