विस्तृत उत्तर
भागवत पुराण के अनुसार स्वर्ग के क्षेत्र में चार विशाल और दिव्य झीलें स्थित हैं। इनमें क्रमशः सबसे शुद्ध जल, दूध, शहद और गन्ने का रस भरा हुआ है। ये चारों झीलें स्वर्लोक के निवासियों के लिए अमृत तुल्य हैं। इन झीलों के सेवन से देवताओं और स्वर्ग के निवासियों में अष्ट-सिद्धियों (अणिमा, महिमा, लघिमा आदि) और योग की प्राकृतिक शक्तियों का स्वतः संचार होता है। ये झीलें सुमेरु पर्वत के निकट देवताओं के विहार क्षेत्रों में स्थित हैं। इनका जल पृथ्वी के किसी भी जल से अत्यंत उत्कृष्ट और दिव्य है। इन झीलों से स्नान और पान करके देवगण अलौकिक आनंद और दिव्य शक्तियाँ प्राप्त करते हैं। ये चार झीलें स्वर्ग के भोग-ऐश्वर्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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