विस्तृत उत्तर
कामिकागम और अन्य शैव आगमों के अनुसार, 'सोमसूत्र' अर्घे का वह हिस्सा या नाली है जहाँ से शिवलिंग के अभिषेक का जल बाहर निकलता है। शिवलिंग की परिक्रमा करते समय इस सोमसूत्र को पार करना पूर्णतः वर्जित है, क्योंकि इसे लांघने से शिव-अपराध लगता है। इसलिए कभी भी पूर्ण 360 डिग्री की परिक्रमा नहीं की जाती, बल्कि 'सव्य-अपसव्य' मार्ग से तीन-चौथाई (3/4) परिक्रमा करके ही वापस लौटना चाहिए।





