विस्तृत उत्तर
पूर्णिमा चंद्रमा (सोम) की पूर्णता की तिथि है। तंत्र-शास्त्र और योग-विज्ञान के अनुसार पूर्णिमा की रात्रि में ब्रह्मांडीय ऊर्जा का स्वतः ऊर्ध्वगमन होता है। स्कंद पुराण के काशी खंड (अध्याय 14) में शिव स्वयं कहते हैं कि चंद्र-तत्त्व से जुड़े लिंगों पर पूर्णिमा के दिन किए गए जप, अर्चना और दान से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
चूँकि सोमानंदीश्वर लिंग पूर्णतः 'सोम-तत्त्व' और मन-शांति से संबद्ध है, इसलिए पूर्णिमा की मध्यरात्रि में यहाँ गोदुग्ध (कच्चे दूध) से अभिषेक करने की सुदृढ़ शास्त्र-समर्थित लोक-परंपरा है। दूध और चंद्र दोनों का रंग श्वेत है, जो शीतलता के प्रतीक हैं। पूर्णिमा पर यहाँ अभिषेक करने से अज्ञात भय, अनिद्रा, अवसाद और उन्माद जैसी मानसिक समस्याएँ जड़ से समाप्त होती हैं।





