विस्तृत उत्तर
यह व्रत दशमी तिथि से ही शुरू हो जाता है। दशमी को सूर्यास्त से पहले केवल एक बार 'हविष्यान्न' (सात्विक भोजन) खाएं। एकादशी की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहाने के पानी में गंगाजल या तिल मिलाकर स्नान करें। स्वच्छ पीले वस्त्र पहनकर हाथ में जल और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन निर्जल, सजल (जल-दूध के साथ) या फलाहार (बिना अनाज के) व्रत रखें। भगवान वराह को तुलसी दल जरूर चढ़ाएं, क्योंकि भगवान विष्णु बिना तुलसी के कुछ ग्रहण नहीं करते। रात में भगवान का जागरण और भजन करें।





