विस्तृत उत्तर
संतोषी माता का व्रत एक 'घरेलू धर्म' है जिसकी विधि अत्यंत सरल है। इसमें किसी पुरोहित या संस्कृत मंत्रोच्चार की आवश्यकता नहीं होती। शुक्रवार के दिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। एक जल का कलश स्थापित करें और उस पर गुड़-चने का भोग रखें। माता की कथा पढ़ें या सुनें। उसके बाद माता की आरती ("मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की") गाएं। अंत में प्रसाद परिवार में बांट दें। पूरे दिन उपवास रखें और ध्यान रहे कि इस दिन घर में कोई भी खटाई न खाए और न ही उसे स्पर्श करे।





