📖
विस्तृत उत्तर
माता, दादी और कुल की उन महिलाओं का श्राद्ध जो सुहागिन रहते हुए मृत्यु को प्राप्त हुईं, केवल नवमी तिथि (सौभाग्यवती श्राद्ध या मातृ नवमी) को किया जाता है। दूसरी ओर, जिन्होंने सन्यास ग्रहण किया हो या जो यति/महात्मा रहे हों, उनका श्राद्ध केवल 'द्वादशी' (बारहवीं) तिथि को करने का शास्त्रीय विधान है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?
