'सर्वमंगल मांगल्ये' मंत्र का क्या अर्थ है?
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सरल उत्तर
'सर्वमंगल मांगल्ये...' = हे नारायणी! तुम सब मंगल करने वाली, शिव रूपा, सभी सिद्धियाँ देने वाली, शरण की रक्षक, तीन नेत्रों वाली गौरी हो — तुम्हें नमस्कार। विष्णु ने ब्रह्मा को उपदेश दिया: इसी आदिशक्ति की कृपा से त्रिदेव सृष्टि संचालन करते हैं।
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