विस्तृत उत्तर
बाणासुर महाबलि का पुत्र और भगवान शिव का परम भक्त था। उसकी कथा शिव पुराण और भागवत पुराण में विस्तार से वर्णित है।
परिचय — बाणासुर हजार भुजाओं वाला महापराक्रमी दैत्य था। उसने घोर तपस्या से शिव को प्रसन्न किया और शिव ने उसे अपना गणपति और कोटपाल (नगर-रक्षक) बनाया। बाणासुर का अभिमान इतना बढ़ा कि उसने शिव से युद्ध की इच्छा प्रकट की। शिव ने कहा — 'जब तुम्हारी ध्वजा टूट जाए, तब युद्ध का समय आएगा।'
उषा-अनिरुद्ध प्रसंग — बाणासुर की कन्या उषा ने स्वप्न में अनिरुद्ध (श्रीकृष्ण के पौत्र) को देखकर उन पर मन लगाया। उसकी सखी चित्रलेखा ने माया से अनिरुद्ध को सोते हुए उठाकर उषा के महल में पहुँचा दिया। जब बाणासुर को पता चला तो उसने नागपाश से अनिरुद्ध को बंदी बना लिया।
शिव-कृष्ण युद्ध — भगवान श्रीकृष्ण अनिरुद्ध को छुड़ाने पहुँचे। बाणासुर की रक्षा के लिए शिव स्वयं युद्धभूमि में उतरे। दोनों में भयंकर युद्ध हुआ। अंत में शिव ने स्वयं बाणासुर को अनिरुद्ध मुक्त करने की आज्ञा दी। बाणासुर ने अनिरुद्ध को मुक्त किया और उषा का विवाह उससे संपन्न हुआ।





