विस्तृत उत्तर
उपमन्यु की कथा शिव पुराण में वर्णित है। उपमन्यु बालपन से ही शिव के अनन्य भक्त थे और दूध पीने की अभिलाषा रखते थे किंतु दरिद्र थे।
तपस्या और इंद्र की परीक्षा — उपमन्यु ने भगवान शिव की घोर तपस्या की। इंद्र ने उनकी परीक्षा लेने के लिए शिव का वेश धारण करके प्रकट हुए और शिव की निंदा करने लगे। उपमन्यु ने इंद्र की बात सहन नहीं की और कहा — 'जो शिव की निंदा करे उसके सामने मैं एक क्षण नहीं रहूँगा।' इंद्र अपने असली रूप में प्रकट हुए और वर देना चाहा, परंतु उपमन्यु ने इंद्र से वर लेने से मना किया।
शिव की कृपा और वर — भगवान शिव प्रसन्न होकर स्वयं प्रकट हुए और वरदान माँगने को कहा। उपमन्यु ने 'क्षीर सागर' (दूध का अटूट स्रोत) का वर माँगा। शिव ने यह वरदान प्रसन्नतापूर्वक दिया।
कृष्ण को दीक्षा — जब भगवान श्रीकृष्ण ने उपमन्यु से शिव-दीक्षा प्राप्त करनी चाही तो उपमन्यु ने उन्हें शिव की उपासना विधि और शैव दर्शन का ज्ञान प्रदान किया। इस प्रकार उपमन्यु शैव परंपरा के महान आचार्य बने।





