विस्तृत उत्तर
जब देवता और असुर अमृत प्राप्ति के लिए क्षीर सागर का मंथन कर रहे थे, तो सबसे पहले हलाहल नामक भयंकर विष प्रकट हुआ।
यह विष इतना तीव्र और विनाशकारी था कि उसकी ज्वाला से संपूर्ण सृष्टि जलने लगी, और सभी लोक, यहाँ तक कि देवता और असुर भी, भयभीत होकर पीछे हट गए।
नीलकंठ स्वरूप की उत्पत्ति का वर्णन शिवपुराण, स्कंदपुराण और अन्य पारंपरिक ग्रंथों में इसी समुद्र मंथन की महान गाथा में मिलता है।





